5 दशक से पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में बंद है सैनिक मंगल सिंह, घर वालों को है आज भी वापसी का इन्तजार

1971 में पाकिस्तान के साथ लड़ाई लड़ने वाला जालंधर का एक वीर सैनिक मंगल सिंह किसके पाकिस्तान की कोट लखपत जेल में जानवरों जैसी जिंदगी जी रहा है। हालांकि लड़ाई की वक्त ड्यूटी के दौरान एक हादसे की शिकार हो गए उन सैनिकों में मंगल सिंह का नाम भी था। लेकिन पत्नी सत्या को घर आज भी नहीं भूलता है। जब रावलपिंडी रेडियो के जरिए पति की सलामती की खबर सुनी थी। नन्हे-नन्हे बच्चों भी अधेड़ कहलाने लगे। लेकिन आज तक मंगल वतन वापस नहीं लौट पाए। सात जन्मों के बंधन से बंधी पत्नी और दो बेटे पिछले 49 साल से उनके इंतजार में है। अपने मंगल को देखने की मंगल कामना पूरी होगी देश के मुखिया को एक बार फिर से देख पाने की आस लगाए बैठा पूरा परिवार सरकारों से मदद मांग रहा है।

आप बता दें कि देश के 74 वे आजादी दिवस के मौके पर अपने सैनिक पिता को याद कर भावुक हुए जालंधर के जिला के बरौली खुर्द के रहने वाले रिटायर्ड फौजी जल्दी सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया है कि उनके पिता मंगल सिंह 19 62 में सेना में भर्ती हुए थे। बात 1971 की है जब रांची से लांस नायक के पद पर उनके पिता को कोलकाता स्थानांतरित किया गया था। छुट्टी पर लौटे तो पत्नी सत्या देवी एक रिश्तेदार शादी में शामिल होने के लिए रुक गई और मंगल आने की कहकर ड्यूटी पर चले गए। अचानक से उनकी ड्यूटी बांग्लादेश के मोर्चे पर लग गई थी।

बेटे दलजीत और पत्नी सत्या के मुताबिक 1971 के काले दिन पर घर पर सेना के एक टेलीग्राम आया कि बांग्लादेश में सैनिकों को ले जा रही एक नाव डूब गई है उसमें सवार मंगल सिंह सहित सभी सैनिक मारे गए हैं।

हालांकि 1972 में 1 दिन रावलपिंडी रेडियो पर मंगल सिंह ने अपना नंबर बताते हुए देशवासियों को संदेश दिया कि वह ठीक है। अपने परिवार के बारे में पूछने पर अब तक परिवार उनकी वापसी की राह देख रहा है। राजनेताओं सेना के अफसरों प्रशासनिक अफसर और मीडिया के माध्यम से कई बार मंगल सिंह की वापसी के लिए कोशिशें की जा चुकी है। आज तक किसी भी तरीके का कोई भी फायदा देखने को नहीं मिला है।

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